ये है बिहार के बाहुबली नेता, जेल में बंद होने के बावजूद बाढ़ सीट से लड़ रहे विधानसभा चुनाव

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जब से बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ है तब से पूरे देश की निगाहें बिहार पर जम गई है। बिहार में 273 सीटों पर 27 अक्टूबर से 3 चरणों में चुनाव होना है। इन चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को घोषित किया जाएगा। इस बार पूरे बिहार में कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। सभी पार्टी चुनाव जीतने के लिए अपने उम्मीदवार के साथ पूरा दम लगा रही है।

इस बार बिहार में कई ऐसे उम्मीदवार खड़े हुए हैं। जिनकी चर्चा बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में हो रही है। आज हम आपको ऐसे ही एक नेता के बारे में बताने वाले हैं जो बिहार में बाढ़ सीट से खड़े हुए। इस उम्मीदवार का नाम अनंत सिंह है। अनंत सिंह बिहार के बाहुबली नेताओं में से एक है। अनंत सिंह एक क्रिमिनल केस के चलते पिछले 13 महीने से जेल में बंद है। इसी कारण वे इस बार जेल में सेही बाढ़ सीट से चुनाव लडे़गें। उन्होंने जेल से ही अपना नामांकन पत्र भरा है।

9 साल की उम्र में ही चले गए थे जेल

अनंत सिंह ने जब से राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखा है वे तब से लगातार सुर्खियों में रहे है। अनंत सिंह का जन्म 1 जुलाई 1961 को बाढ़ के गांव नदमां में हुआ है। अनंत सिंह चार भाईयों में सबसे छोटे और सबसे तेज थे। गांव के कुछ लोगों द्वारा बताया जाता है कि अनंत सिह मात्र 9 साल की उम्र में ही जेल चले गए थे। हालांकि कुछ समय बाद वह जेल से छूट आए।

छवि ऐसी बनाई कि बन गए क्षेत्र के राॅबिनहुड

अनंत सिंह काफी कम उम्र में जेल चले गए थे। जिसके बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में दबंगई के तौर छवि बनाना शुरू कर दी थी। अनंत सिंह अपने काम, दादागीरी और अंदाज के कारण इतने प्रभावशाली हो गए थे कि एक समय उनके क्षेत्र के लोग उन्हें ‘राॅबिनहुड’ के नाम से पुकारने लगे थे। अनंत सिंह ने अपने अंदाज में बग्घी पर बैठकर पटना का चक्कर लगाया था। अनंत ने इसका वीडियो भी बनवाया और ‘छोटे सरकार’ गाना लगवाकर वायरल भी किया। उनके इस अंदाज के कारण वे पूरे बिहार में प्रसिद्ध हो गए।

खुद से पहले भाई को लड़ाया चुनाव

अनंत सिंह जानते थे अगर उन्हें अपने क्षेत्र में सिक्का जमाना है तो उन्हें राजनिति में कदम रखना पड़ेगा। अनंत सिंह सीधे राजनीति में कदम नहीं रखा उन्होंने पहले अपने बड़े भाई दिलीप सिंह को अपने क्षेत्र की सीट मोकामा से 1985 में निर्दलीय से पहली बार चुनाव लड़ाया। हालांकि उनका बड़ा भाई यह चुनाव हार गया। लेकिन अनंत सिंह और उनके परिवार के लिए इस चुनाव के बाद राजनीति के दरवाजे खुल गए। इसके बाद अनंत सिंह ने साल 2005 में पहली बार मोकामा सीट से चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत दर्ज की। इसके बाद अनंत सिंह ने लगातार 4 बार इस सीट से चुनाव जीता।

दोस्ती ऐसी कि नितीश कुमार को चांदी के सिक्कों से तुलवाया

अनंत सिह की राजनीति में आने के पहले से ही अपने क्षेत्र में अच्छी पकड़ थी। इस बातों को पूरा बिहार जानता था। इस लिए साल 2004 में जब पूरे देश में लोकसभा चुनाव हो रहे थे। उसी समय अनंत सिंह के क्षेत्र बाढ़ में भी कड़ा मुकाबला हो रहा था। उस दौरान सूरजभान सिंह लोजपा में शामिल हो गए। उनके खिलाफ नितीश कुमार लगातार छठी बार बाढ़ से चुनाव लड़ रहे थे। नितीश जानते थे अगर उन्हें बाढ़ सीट जीतनी है तो उन्हें क्षेत्र के राॅबिनहुड अनंत सिंह से हाथ मिलाना होगा।
नितीश के करीबी ललन सिंह ने एक दूसरे को मिलाया। इसके बाद नितीश और अनंत काफी आच्छे दोस्त बन गए। अनंत सिंह ने नितीश को चुनाव जिताने का जिम्मा अपने कंधो पर उठाया। इसके बाद नितीश ने बाढ़ क्षेत्र में काफी रैली भी की। अनंत सिंह ने दोस्ती के खातिर नितीश सिंह को चांदी के सिक्कों से तुलवाया। इसका वीडियो भी वायरल हुआ और इसके लिए नितीश सिंह की काफी आलोचना भी हुई। हालांकि नितीश यह सीट हार गए लेकिन नितीश ने नालंदा सीट से जीत दर्ज की। इस हार का दोनों की दोस्ती पर ज्यादा असर नहीं हुआ और आगे जाकर अनंत सिंह भी नितीश कुमार की पार्टी में शामिल हुए।

राजनिति और क्राइम ही नहीं अपनी शौक के कारण काफी चर्चित अनंत सिंह

बिहार के अनंत सिंह अपनी राजनीति और क्राइम के कारण चर्चित ही नहीं बल्कि अपनी शौक के कारण भी काफ़ी चर्चित है। अनंत सिंह को जानवर पालने का काफी शौक है। अनंत सिंह ने अपने घर में अजगर, हाथी सहित कई जानवर पाल रखे हैं। अनंत सिंह को घोड़े भी काफी पसंद है। उन्हें जो घोड़ा पसंद आता है उसे किसी भी कीमत में खरीद लेते हैं।

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