दीवाली के पहले छत्तीसगढ़ के कुम्हार ने बनाया जादुई दीपक, 24 घंटे तक लगातार जलेगा दीया

0
15

पूरे देश में दीवाली की तैयारियाँ शुरू हो गई है। दीवाली को रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है। दीवाली पर घर और कार्यालय को रोशन करने के लिए लिए तरह तरह के दीयों को जलाया जाता है। लेकिन वे दीयें कुछ समय तक ही जल पाते है। जिसके बाद वह अपने आप बुझ जाते हैं।

लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जादुई दीयें के बारे में बताने वाले हैं। जो लगातार 24 घंटे जल सकता है। इस दीयें को छत्तीसगढ़ के गांव कसौरा में रहने वाले अशोक चक्रधारी ने बनाया है। इस दीयें के बनने के बाद लोग दूर – दूर से इसे मंगवा रहे हैं और इस दीयें को काफी पसंद भी कर रहे हैं।

जानिए जादुई दियें के आकार के बारे में 

इस जादुई दियें को कुम्हार अशोक चक्रधारी ने बनाया है। इस जादुई दीयें को दो हिस्सों में बनाया गया है। जिसमें ऊपर के हिस्से को गोलाकार रूप से बनाया गया है। जिसमें बत्ती रखी गई है। जबकि दूसरे हिस्से को केतली की तरह बनाया है। जिसमें तेल में तेल भरा जाता है। इसमें से तेल निकालने के लिए एक छोटी सी नली बनाई है। जिससे तेल निकाला जा सके। इस दियें को इस अद्भुत अंदाज में बनाया है कि जैसे ही तेल खत्म हो तो इस नली से तेल निकल सके।

जानिए कैसे आया जादुई दीयें का आईडिया

इस जादुई दीयें के बारे में कुम्हार अशोक चक्रधारी ने बताया कि मैं पिछले साल भोपाल गया था। उस दौरान मैंने एक प्रदर्शनी देखी। जिसमें कई अनुभवी कलाकारों ने मिट्टी के अच्छे अच्छे नमूने बनाए थे। जिसके बाद मैं समझा था कि मिट्टी की उपयोगिता असमिति है। इससे कितना कुछ अच्छा बनाया जाता है। उसके बाद मैंने गांव आकर मिट्टी से इस जादुई दीयें को बनाने का सोचा। उसके बाद पहले 3 प्रयास में तो मैं असफल रहा लेकिन चौथे प्रयास में कामयाब हो गया।

अब देशभर से आ रहे जादुई दीयें के लिए ऑर्डर

अशोक के इस दीयें को बनाने के बाद निरंतर मांग बनी हुई है। अशोक के पास अब दिल्ली, मुंबई, जयपुर समेत पूरे देश में इस जादुई दीयें को मंगाया जा रहा है। अशोक ने बताया कि पहले वह रोजाना 30 दीयें बनाते थे लेकिन बढ़ती मांग के कारण उन्होंने अब 100 दीयें रोजाना बनाना शुरू कर दिये है। दीवाली पर सभी ग्राहकों की मांग पूरी हो जाए इसलिए अशोक ने ट्रांसपोर्ट और पैकैजिंग की व्यवस्था भी कर ली है।

यह भी पढ़े – बेटी की सुरक्षा के लिए एक माँ ने तैयार किया सुरक्षा ऐप, जो ऐप बताएगा कि कौन-सा क्षेत्र महिलाओं के लिए ज्यादा सुरक्षित है?

काफी संघर्ष में गुजरा अशोक का बचपन

अशोक का जीवन अब तक काफी संघर्षपूर्ण रूप से बीता है। अशोक के पिता भी कुम्हार थे और मिट्टी की वस्तुएं बनाते थे। अशोक ने चौथी कक्षा तक पढ़ाई की। परिवार में तंगी के कारण उसके बाद वह उनके पिता के साथ काम में लग गए।
लगभग दस पहले अशोक के माता-पिता का देहांत हो गया। उसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी अशोक के कंधे पर आ गई। उसके बाद भी अशोक आगे बढ़ते रहे।

कभी हार नहीं मानी अशोक ने

अशोक चक्रधारी ने बचपन से ही कई चुनौतियों का सामना किया है और अशोक बचपन से ही मिट्टी के वस्तुएं बनाने का काम कर रहे हैं। अशोक ने इस बारे में बताया “मैं शुरू से यहीं काम कर रहा हूँ। समय के साथ मैंनें कई बदलाव देखें है। लोहा, स्टील और प्लास्टर आॅफ पेरिस के कई वस्तुओं के आने के कारण मिट्टी की वस्तुओं की मांग में कमी आयी है लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। मैं लगातार इस काम में लगा रहा। जिसका फल अब मुझे मिला है। मेरी मिट्टी ही मेरी जिंदगी है।”

अपने दूसरे साथियों को भी सिखाना चाहते हैं कला

अशोक का जीवन में केवल मेहनत करना और कमाई करना मकसद नहीं बल्कि दूसरों को भी यह कला और इसके महत्व के बारे में समझना मकसद है। अशोक नियमित रूप से अपने काम के बाद युवाओं के साथ बैठते हैं और उन्हें सुचारू रूप से यह काम सिखाते हैं। अशोक ने इस बारे में कहा कि मैं आने वाली पीढ़ी को भी यह कला सिखाना चाहता हूँ। क्योंकि इसमें अथासंभव भविष्य है।

यह भी पढ़े – इत्तेफाक से मिले तीन दोस्त, तीनों ने मिलकर कुछ ही समय में खड़ा किया 1 करोड़ का स्टार्टअप

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here