इंदौर के समाजसेवी ‘पापाजी’ नहीं रहे, अपने कार्यो से पूरे शहर में पेश में की मानवता की मिसाल

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कहते है न दुनिया में जो व्यक्ति अच्छे होते हैं भगवान जल्द ही उन्हें अपने पास बुला लेता है। शायद ऐसा ही कुछ इंदौर के समाजसेवी अमरजीत सिंह सूदन के साथ हुआ। अमरजीत सिंह पिछले 1 महीने से बीमार थे। उन्होंने मंगलवार को इंदौर की गुर्जर अस्पताल में आखिरी सांस ली। समाजसेवी अमरजीत सिंह को पूरा शहर पापजी के नाम जानता था। अमरजीत सिंह ने अपने समाजसेवा के कार्यो से पूरे इंदौर का दिल जीत रखा था और एक नि:स्वार्थ समाजसेवी की मिसाल पूरे शहर के सामने पेश की थी।

अमरजीत सिंह की मौत की खबर सुनने के बाद पूरे शहर में शोक फैल गया। अमरजीत सिंह ने अपने समाजसेवा के कार्यो इंदौर वासियों के दिल में एक अलग ही जगह बना रखा थी। वे कई जरूरतमंद लोगों की मदद किया करते थे। कई बार जब किसी व्यक्ति का कोई परीचित नहीं मिलता था। वह उनका अंतिम संस्कार भी करते थे। अमरजीत हर इंदौरी के दिल के नजदीक थे।

पिता से मिली थी जरूरतमंदों की मदद करने की सीख

अमरजीत सिंह सूदन का जन्म खंडवा में हुआ था और वे खंडवा के ही रहने वाले थे। अमरजीत सिंह को जरूरतमंदों की मदद करने की सीख भी उन्हें खंडवा में ही मिली थी। जब अमरजीत सिंह 14 साल के थे तब वे एक बार से लौट रहे थे उस दौरान एक बुजुर्ग औरत एक बुजुर्ग व्यक्ति के पास बैठकर रो रही थी। अमरजीत को यह देखकर आश्चर्यजनक लगा और अमरजीत ने उस महिला से पूछा कि आप क्यों रो रही हो।

तब उस महिला ने जबाव दिया कि यह मेरे पति है और इनकी मृत्यु हो चुकी है और अब मेरे पास इतने पैसे नहीं कि मैं इन्हें घर ले जा सकूं या इनका अंतिम संस्कार कर सकूं। इसके बाद अमरजीत से यह देखा नहीं गया और घर जाकर उसने अपनी गुल्लक तोड़कर सभी पैसे इकट्ठे किए और जब फिर से अमरजीत सिंह घर पहुंचे तब उनके पिता जी ने पूछा बेटा आज बहुत लेट हो गए। तब अमरजीत ने अपने पिताजी को पूरा किस्सा सुनाया। सबकुछ सुनने के बाद अमरजीत को उनके पिता ने गले लगा लिया ओर बोले तुमने बहुत कम उम्र बहुत बड़ा काम किया। ऐसे ही अच्छे काम करते रहो।

इंदौर में कंट्रोल रूम से मदद मांगने पर दिया जता था पापाजी का नंबर

इंदौर पुलिस कंट्रोल रूम में जब भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति का मदद के लिए फोन आता था तब पुलिस कंट्रोल रूम से अमरजीत सिंह का नंबर दिया जाता था। यहां जैसे ही अमरजीत सिंह को जरूरतमंद का पता लगता था। वे तुरंत मदद करने उनके पास पहुंच जाया करते थे।

एकबार एक लड़के के शरीर पर लगे कीड़े खुद के हाथ से निकाले थे

अमरजीत सिंह अपने कार्यो से पूरे शहर के सामने मानवता का मिसाल पेश करते थे। एकबार जब अमरजीत सिंह को एमवाय के बाहर 24-25 साल का लड़का गंभीर स्थिति में लेटा पड़ा था। तब उसे लेकर अमरजीत सिंह एमवाय अस्पताल ले गए। लेकिन एमवाय अस्पताल में किसी ने सुध नहीं ली। उसके बाद वे उसे मदर टेरेसा के निवास ज्योति ले गए। जहाँ पहुंचकर उन्होंने खुद उस लड़के शरीर पर लगे कीड़े साफ किए और उसका अस्पताल में इलाज कराया।

नग्न अवस्था में मिली युवती की लाश को पहनाई अपनी पगड़ी

अमरजीत सिंह कभी किसी की मदद करने से पीछे नहीं हटते थे। ऐसा ही कुछ एकबार हुआ था। जब उन्हें एक 12-13 साल की नाबालिक लड़की की लाश नग्न अवस्था में बिलावली तलाब के पास मिला थी। उस लड़की के शरीर पर कपड़े न होने के बाद उस लड़की को अमरजीत सिंह ने अपनी पगड़ी उतारकर पहना दी। जिसके बाद उनकी समाज के द्वारा रोष का भी सामना करना पड़ा। लेकिन अमरजीत सिंह ने कहा अगर जरूरत पड़ी तो मैं ऐसा बार बार करूंगा।

संस्था न बनाकर अकेले की सबकी सेवा

अमरजीत सिंह 55 साल से समाजसेवा का कार्य कर रहे थे। इस दौरान कई बार उन्हें संस्था बनाकर सेवा करने को भी कहा लेकिन वे कभी कोई संस्था नहीं बनाना चाहते थे। वे कहते थे कि संस्था बनाकर कोई तमाझम खड़े नहीं करना चाहता। बस हमेशा ऐसे ही लोगों की मदद खरना चाहता हूँ।

 

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